Elizabeth हिन्दी सीखना चाहती है। वो हिंदी क्लब के meeting में आई थी। कम बोल रही थी। बोल ही नहीं रही थी। जो भी बात कर रहा होता, उससे मुस्कुराते हुए देखती रहती। एक white american जितनी गोरी। सुंदर चेहरा। दुबला शरीर। लम्बे सुनहरे बाल। ढीला ढाला low cut वाला टॉप पहने unaware सी बैठी थी। काफी शर्मा रही थी। और काफी curious सी भी थी। एक नोटबुक में बीच बीच में कुछ लिखती रहती । और आतुरता से सबको देखती। मैंने Elizabeth से पूछा के क्या मैं उसकी नोटबुक देख सकता हूँ। बेचारी मना नहीं कर पाई। उसकी नोटबुक देख कर मैं खुश हो गया। भयंकर खुश। मेरी ख़ुशी देख कर वो खुश हो गई। मैंने उसे अपने स्कूल के दिनों के बारे में बताया। अपनी हिन्दी की लिखावट दिखाई। उसकी लिखावट मोतियों जैसी थी। और मेरी ऐसी के मानो जैसे कागज़ पर श्याही में गोते लगाए मकोड़े dance कर गए हों। हम सब लोगों ने खूब बातें की। भाषाओँ के बीच के रिश्तों कि। भाषाओँ के हमारे व्यहवार पर, और हमारे व्यहवार के हमारी भाषा पे असर पर। सजहता और जटिलता पर। सीखने सीखने के तरीकों पर। वो अपने आप को language nerd बुलाती है। मैंने Elizabeth से कहा के वो इंडिया ज़रूर जाए। टारगेट दे दिया के 2015 में ही जाए। ये भी कहा के डरे नहीं, इंडिया में जितने ऐसे लोग मिलेंगे जिनसे उसे बच के रहना पड़ेगा, उतने ही या उसे ज्यादा ऐसे दोस्त मिलेंगे के वो वहीँ बस जाना चाहेगी। अंदर ही अंदर एक silent prayer भी कह डाली के Elizabeth का इंडिया में experience उसकी हिन्दी जितना ही सुंदर हो। उस डर का क्या फायदा के शायद ऐसा ना हो? और उस डर का इलाज़ क्या हो सोचिये? वैसे मैंने Elizabeth को homework दे दिया है के वो अच्छा सा हिन्दी गाना सीख कर सुनाये अगली बार।

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